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                                                                chapter===1

                एकाउण्टिंग के मूल सिध्दान्त (Basic Accounting Concepts)

Tally (टैली) = टैली एक एकाउण्टिंग साँफ्टवेयर है, जिसमें एकांउट्स से ही सम्बन्धित कार्य किये जाते है। एकाउण्ट्स के अपने कुछ नियम होते है। इसलिये टैली में कार्य करने से पहले इसकी जानकारी लेना आवश्यक है। एकांउट्स का कार्यक्षेत्र असीमित है। अतः टैली में कार्य करने के लिये इसके मुख्य तत्वों का ज्ञान होना आवश्यक है। इस अध्याय में हम एकाउंटिग की बेसिक जानकारी का अध्ययन करेंगे।

एकांउटिंग क्या है? (What is Accounting)

एकाउंटिंग व्यापारिक लेन-देनों को सुनियोजित ढंग से अलग-अलग विभाजित ,रिकार्ड करने तथा परिणाम निकालने की कला है। दूसरे शब्दों में एकाउंटिंग व्यापार की वह भाषा है, जिसके द्वारा एक व्यापारी दूसरे व्यापारी से व्यापारिक या वित्तीय व्यवहारों का आदान-प्रदान करता है।

एकाउंटिंग की विशेषताएं ( Attributes of Accounting)

एकाउंटिंग का अभिप्राय व्यापार की लेन-देन को विभाजित व रिकार्ड करने तथा परिणाम निकालने से है। इसकी विशेषताएं निम्न प्रकार है।

Financial Transaction =एकाउंट्स में केवल उन्ही लेन-देनों को रिकार्ड किया जाता है जिनकीवित्तीय कीमत होती है। यदि किसी लेन-देन की कोई वित्तीय कीमत नही है तो उसे बुक्स आँफ एकाउंट्स में रिकार्ड नही किया जाता है। जैसे- चार घोड़े खरीदे या एक मकान खरीदा। इस लेन-देन की कोई वित्तीय कीमत नही है। अतः इसे रिकाँर्ड नही किया जा सकता है।

Recording= व्यापारिक लेन-देन को बुक्स आँफ एकाउंट्स में रिकाँर्ड करने की कला को ही रिकार्डिंग कहा जाता है। सभी व्यापारिक लेन-देनों को पहले जर्नल में तथा उसके बाद अलग-अलग किताबों में रिकॉर्ड किया जाता है, जैसे कैश बुक, परचेज बुक, सेल्स बुक आदि।

Classification = सभी व्यापारिक लेन-देनों को अलग-अलग भागों में बाँटने की कला वर्गीकरण कहलाती है। वर्गीकरण एक प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से व्यापारिक लेन-देनों को अलग-अलग भागों में विभाजित कर उन्है एक किताब में रिकॉर्ड किया जाता है, जिसे लेजर बुक कहते है। लेजर बुक में व्यापार से सम्बन्धित सभी खाते होते है।

Summarising = समराइजिंग के द्वारा वर्गीकृत किए गयें डाटा से परिणाम निकालते है । तथा व्यापार के अंतिम खाते तैयार करते है, जैसे-बैलेंस शीट, तलपट(ट्रायल बैलेंस) आदि।

एकाउंटिंग के उद्देश्य (purpose of Accounting)

एकाउंटिंग का मुख्य उद्देश्य व्यापारियों को व्यापार से सम्बंधित क्रियाकलापों का ज्ञान कराना है, जिनका विवरण निम्न प्रकार है।

Purchase & Sales Information = एकांउट्स व बुक कीपिंग के द्वारा ही एक व्यापारी यह जानकारी प्राप्त कर सकता है कि व्यापार में कितना माल खरीदा गया है, कितना माल बेचा गया है और कितना शेष बचा है।

Amount Information = एकाउंट्स व बुक कीपिंग के द्वारा रकम की सही-सही जानकारी प्राप्त की जा सकती है। एकाउंट्स के द्वारा ही यह पता चलता है कि व्यापार में कितनी रकम नकद, कितनी बैंक में तथा किस-किस बैंक में जमा है।

Creditors Information =एकाउंट्स के माध्यम से ही यह पता चलता है कि व्यापार में कितने लेनदार है और किन किन लेनदारों को कितना-कितना पैसा देना है। इसके अलावा लेनदारों के बारे में संपूर्ण जानकारी भी एकाउंट्स के माध्यम से ही प्राप्त की जा सकती है।

Debtors Information =  एकाउंट के माध्यम से ही लेनदारों की तरह देनदारों के बारे में भी संपूर्ण जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

Capital Information = एकाउंट्स के द्वारा ही व्यापारी पूँजी की सही-सही जानकारी प्राप्त कर सकता है। इसके अतिरिक्त व्यापार के आरंभ व अंत में कैपिटल में हुए बदलावों की जानकारी भी प्राप्त की जा सकती है।

Profit & loss Information = व्यापार में होने वाले लाभ तथा हानि की सही जानकारी भी एकाउंट्स के द्वारा ही प्राप्त की जा सकती है।

Income-Expenses Information = एकाउंट्स के द्वारा ही व्यापारी को यह पता चलता है कि व्यापार से कितनी आय हो रही है तथा कहाँ कहाँ से हो रही है । इसी तरह व्यापार में होने वाले विविध खर्चों की संपूर्ण जानकारी भी प्राप्त की जा सकती है।

Assets Information = व्यापार में सभी प्रकार की स्थाई व अस्थाई सम्पत्तियों की सही-सही जानकारी एकाउंट्स के द्वारा ही प्राप्त की जा सकती है।

Liabilities Information =  व्यापार में सभी प्रकार के दस्तावेजों की जानकारी भी एकाउंट्स के द्वारा ही प्राप्त की जा सकती है।

Tax Information =  व्यापार में प्रति वर्ष कई प्रकार के कर देने होते है जैसे-विक्रय कर, आयात कर, आयकर आदि। इन सभी करों एंव उनके भुगतान से सम्बंधित जानकारी एखाउंट्स के द्वारा ही प्राप्त की जा सकती है।

एकाउंटिंग के लाभ (Benefits of Accounting)

 व्यापार में होने वाले लेन-देनों को बुक्स आँफ एकाउंट्स में रिकाँर्ड करने से अनेक लाभ जिनका विवरण इस प्रकार है।

Evaluation of Business = व्यापारिक लेन-देनों को बुक्स ऑफ एकाउंट्स में रिकाँर्ड करने से इनका मूल्यांकन आसानी से किया जा सकता है तथा व्यापार को बेचते समय उसकी आर्थिक स्थिति भी स्पष्ट की जा सकती है। क्रेता तथा विक्रेता दोनों के लिए व्यापार का मूल्याकन करना लाभदायक है।

Knowledge of Economic Position = कोई भी व्यापारी तब तक व्यापार की सही  आर्थिक स्थिति का पता नही लगा सकता, जब तक व्यापारिक लेन-देनों को बुक्स आँफ एकाउंट्स में रिकार्ड नही किया जाता। एकाउंट्स से सभी प्रकार की जानकारियाँ प्राप्त की जा सकती है तथा व्यापार की सही आर्थिक स्थिति का पता लगाया जा सकता है।

Precautious for Mistake = व्यापार में होने वाली सभी लेन-देनों को याद नही रखा जा सकता है। इसलियें उन्है बुक्स ऑफ एकाउंट्स में रिकाँर्ड किया जाता है जिससे भविष्य में आवश्कता पड़ने पर उन्है देखा जा सके। और निस्कर्ष निकाला जा सके। ऐसा करने से भविष्य में होने वाली गलतियों से बचा जा सकता है।

Quick Decision =  व्यापारी को कुछ मामलों में शीघ्र निर्णय लेने होते है। ये निर्णय बुक्स ऑफ एकाउंट्स की रिपोर्टस के आधार पर ही लिए जा सकते है।

Future Planning = सभी व्यापारी अपने व्यापार को आगे बढ़ाने के लिए भावी योजनाएं तैयार करते है । ये सभी योजनाएं व्यापार की आर्थिक स्थिति के आधार पर ही तैयार की जा सकती है।

Taxation = प्रत्येक व्यापारी को व्यापार में अनेक प्रकार के कर देने होते है जैसे- आयकर, आयात कर विक्रय कर आदि। यजि सभी व्यापारिक लेन-देनों को बुक्स आँफ एकाउंट्स में रिकाँर्ड किया गया है तो सभी करों का सही-सही निर्धारण किया जा सकता है तथा व्यापारी अतिरिक्त कर देने से बच जाता है।

एकाउंटिंग के प्रमुख शब्द (Accounting Terminology)

Capital = कैपिटल का अर्थ उस धनराशि से है , जो प्रोपराइटर (व्यापार का मालिक) द्वारा व्यापार में लगाई जाती है, अर्थात व्यापार आरंभ करने के लिए लगाई गई धनराशि को कैपिटल कहते है।यह धनराशि नकद, माल या सम्पत्ति के रुप में लगाई जा सकती है। फर्म के लिए कैपिटल दायित्व , जबकि मालिक के लिए सम्पत्ति होती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि मालिक और व्यापार दोनों अलग-अलग एंटिटी है।

Liabilities = दायित्व का अर्थ उस धनराशि से है, जो फर्म द्वारा बाहरी व्यक्तियों को चुकानी होती है। दायित्वों को दो भागों में विभाजित किया जाता है।

Long Term Liabilities =ऐसे दायित्व जो लम्बे समय(एक वर्ष से अधिक) तक चुकाने होते है। जैसे- लोन, ऋण-पत्र आदि।

Current Liabilities = ऐसे दायित्व जो कम समय (एक वर्ष से कम) तक में चुकाने होते है जैसे लेनदार, बिल पेयबिल आदि।

Assets = सम्पत्ति का अर्थ उस धनराशि से है, जिसकी व्यापार में कीमत है। दूसरे शब्दों में व्यापार में विधमान कोई भी वस्तु, सामान, माल आदि जिसे या तो नकदी में बदला जा सकता है। या उससे व्यापार में मुनाफा कमाया जासकता है सम्पत्ति कहलाती है, जैसे देनदार, माल, मकद,फर्नीचर, मशीनरी, भवन आदि। सम्पत्ति को दो भागों में विभाजित किया जाता है।

Fixed Assets = इन सम्पत्तियों को व्यापार चलाने के लिए खरीदते है न कि बेचने के लिए जैसे- जमीन, भवन, मशीन, फर्नीचर आदि।

Current Assets = इन सम्पत्तियों को कुछ समय के लिए रखा जाता है, तथा बाद में इन्है कैश में आसानी से बदला या बेचा जा सकता है जैसे- बचा हुआ माल, देनदार नकद, बैंक बैलेंस आदि।

Proprietor = प्रोपराइटर वह व्यक्ति होता है जो व्यापार में पूँजी लगाता है तथा उससे जुड़े सभी जोखिम उठाता है। वह व्यापार में होने वाले लाभ व हानि के लिए भी उत्तरदायी होता है।

Drawings = प्रोपराइटर या पार्टनर द्वारा व्यापार से निजी प्रयोग के लिए जो माल या धनराशि निकाली जाती है उसे आहरण कहते है।

Partner =  जब व्यापार में दो या दो से अधिक व्यक्ति शामिल होते है तो उन्है पार्टनर कहते है। दो या दो से अधिक व्यक्तियों द्वारा मिलकर चलाने वाले व्यापार को हिस्सेदारी या साझेदारी फर्म कहते है।

Creditor = लेनदार वे व्यक्ति/फर्म/ कंपनी होते है, जिनसे उधार में माल, वस्तु या सामान खरीदा जाता है। ये व्यापार के दायित्व होते है।

Debtor = देनदार वे व्यक्ति/फर्म/कंपनी होते है, जिन्है उधार में माल, वस्तु या सामान बेचा जाता है। ये व्यापार की सम्पत्ति होते है।

Purchases = व्यापार में क्रय का सम्बंध केवल माल खरीदने से है। अर्थात क्रय वस्तु शब्द का प्रयोग केवल उस समय किया जाता है, जब माल खरीदा जाता है। माल वे वस्तुएं होती है, जिन्है बेचने के लिए या पक्का माल तैयार करने के लिए खरीदते है जो माल नकद में खरीदा जाता है उसे कैश परचेज तथा जो माल उधार में खरीदा जाता है उसे क्रेडिट परचेज कहते है।

Sales = व्यापार में विक्रय का सम्बंध केवल माल बेचने से है, अर्थात विक्रय शब्द का प्रयोग केवल उस समय किया जाता है जब माल बेचा जाता है। जो माल नकद में बेचा जाता है उसे कैश सेल तथा जो माल उधार में बेचा जाता है उसे क्रेडिट सेल कहते है।

Purchase Return or Sales Return =  खरीदा गया माल जब किसी कारणवश वापस लौटाया जाता है, तो उसे परचेज रिटर्न कहते है। इसी प्रकार जब कोई ग्राहक बेचे गए माल को वापस लौटाता है तो उसे सेल्स रिटर्न कहते है।

Discount = जब माल की कीमतों में कमी की जाती है, तो उसे छूट कहते है। जब यह छूट माल को बेचते समय की जाती है तो व्यापारिक छूट तथा भुगतान के समय की जाती है तो नकद छूट कहलाती है।

Revenue = रिवेन्यू का अर्थ उस धनराशि से है, जो व्यापार में किए गए क्रियाकलापों के परिणामस्वरुप प्राप्त होती है, जैसे माल की विक्री, कुल आय आदि।

Income =  आय रिवेन्यु से भिन्न होती है। यह वह धनराशि है जो रिवेन्यु में से खर्चों को घटाये जाने के उपरान्त प्राप्त होती है अर्थात आय को (आय कुल आय-खर्च) प्रकार से दर्शाया जा सकता है।

Expenses = खर्चों का अर्थ उस धनराशि से है, जो रिवेन्यु प्राप्त करने, माल तैयार करने और उसे बेचने के लिए खर्च की जाती है।

Stock = स्टाँक शब्द का अर्थ उस माल से है, जो एक निश्चित अवधि तक शेष रह जाता है। इसे ओपनिंग तथा क्लोजिंग स्टाँक में विभाजित किया जाता है।

Profit = लाभ वह धनराशि है जो व्यापार में सभी प्रकार के ऑपरेशन के पश्चात आय में से खर्चों को घटाने पर शेष रहती है। अर्थात जब आय खर्चों से अधिक होती है, तो लाभ होता है इसे दो भागों में विभाजित किया जाता है।

Gross Profit =  रिवेन्यू में से माल की कीमत और उन पर होने वाले खर्चों को घटाने के पश्चात जो धनराशि शेष रहती है, उसे कुल लाभ कहते है।

Net Profit =  कुल लाभ में से व्यापार के सभी अन्य खर्चों को घटाने के बाद जो धनराशि बचती है उसे शुद्ध लाभ कहते है।

Loss =  जब व्यय आय से अदिक होते है, तो उसे हानि कहा जाता है इसे मुख्यतः दो भागों में विभाजित किया जाता है।

Gross Loss=  खर्चों में से आय को घटाने के पश्चात जो धनराशि शेष रहती है उसे कुल हानि कहते है।

Net Loss = कुल हानि में से अन्य खर्चों को घटाने के पश्चात जो धनराशि शेष रहती है उसे शुद्ध हानि कहते है।

Transaction =  जब व्यापार से सम्बंधित कोई भी ऐसा कार्य किया जाता है, जिसकी फाइनेंशियल वेल्यू होती है, लेन-देन कहलाती है। उदाहरण के लिए माल या सामान खरीदना व बेचना भुगतान करना या प्राप्त करना आदि सभी लेन-देन कहलाती है।

Voucher =  वाउचर फाइनेंशियल एकाउंटिंग का मुख्य दस्तावेज है। व्यापार में प्रत्येक लेन-देन को पहले बाउचर में लिखा जाता है, तत्पश्चात उसे बुक्स आँफ एकाउंट्स में रिकाँर्ड किया जाता है।

बुक्स आँफ एकाउंट्स (Books of Accounts) =  सभी व्यापारिक संगठन अपने व्यापार की लेन-देन को किताबों में रिकाँर्ड करते है, जिन्है बुक्स आँफ एकाउंट्स कहते है। इन्है मुख्यतः तीन भागों में विभाजित किया जाता है।

1. कैश बुक

2. जर्नल बुक

3.  जनरल लेजर बुक

1. कैश बुक (Cash Book) =  इस बुक का प्रयोग नकद में की गई प्राप्ति व भुगतान से सम्बंधित लेन-देनों को रिकाँर्ड करने के लिए किया जाता है, ये लेन-देन नकद या बैंक के माध्यम से हो सकती है। कैश बुक्स मुख्य रुप से चार प्रकार की होती है।

Single Column Cash Book = इस कैश बुक में सभी नकद व बैंक लेन-देनों को एक ही काँलम में रिकाँर्ड करते है।

Double Column Cash Book = इस कैश बुक में सभी कैश और बैंक लेन-देनों को अलग-अलग काँलम में रिकाँर्ड करते है।

Three Column Cash Book = इस कैश बुक में कैश, बैंक और छूट को अलग-अलग काँलम में रिकार्ड करते है।

Petty Cash Book = यह एक विशेष प्रकार की कैश बुक होती है। इसका प्रयोग प्रतिदिन होने वाले खर्चों को रिकार्ड करने के लिए किया जाता है। इसे काँलमर कैश बुक भी कहते है।

जनरल बुक (Journal Book) = इस बुक का प्रयोग उधार लेन-देनों के लिए करते है। इसे कई सहायक बक में विभाजित किया गया है, जो इस प्रकार है।

Purchase Books = इस बुक का प्रयोग उधार खरीदे गये माल को रिकाँर्ड करने के लिए करते है।

Sales Books =  इस बुक का प्रयोग उधार बेचे गये माल को रिकाँर्ड करने के लिए किया जाता है।

Purchase Return Books =  इस बुक का प्रयोग खरीदे गये माल को वापिस लौटाने पर करते है।

Sales Return Book =  इस बुक का प्रयोग बेचे गये माल के वापिस लौटने पर करते है।

Journal Proper Books =  इस बुक का प्रयोग माल के अलावा अन्य प्रकार के उधार लेन-देनों को रिकाँर्ड करने के लिए करते है जैसे- फर्नीचर मशीन आदि।

Transaction

जनरल लेजर बुक (General Ledger Book) =  यह व्यापार की एक विशेष बुक होती है। इसमें संगठन के सभी खाते होते है। सभी व्यापारिक लेन-देन चाहे वह नगद या उधार हो, कैश या जनरल बुक में रिकाँर्ड हो अंत में सभी को इसी बुक में रिकार्ड किया जाता है।

journal  Book
Cash Book
General Ledger Book

एकाउंट्स का वर्गीकरण (Classification of Accounts) = एकाउंट्स एक खाता होता है जिसके नाम से लेन-देनों को बुक्स आँफ एकाउंट्स में रिकाँर्ड किया जाता है। अर्थात प्रत्येक व्यापारिक लेन-देन को किसी न किसी खाते के नाम से रिकार्ड किया जाता है। खाते को अलग-अलग भागों में विभाजित किया जाता है, जो अलग-अलग अपरोच पर आधारित होते है। ट्रेडिशनल अपरोच के आधार पर खातों को तीन भागों में विभाजित किया गया है, जो निम्न प्रकार है।

Personal Account = ये खाते किसी व्यक्ति विशेष, फर्म, कंपनी, क्लब आदि से सम्बंधित होते है, जैसे राम, श्याम, न्यूलैंड क्लब, पब्लिकेशन आदि।

Real Accounts =  ये सम्पत्ति से सम्बंधित होते है, जैसे फर्नीचर, मशीनरी, भवन, जमीन, कैश माल आदि।

Nominal Accounts =  ये खाते आय-व्यय या लाभ हानि से सम्बंधित होते है, जैसे -क्रय,विक्रय, छूट, मजदूरी आदि।

                                                Rules For Debit and Credit

Personal Account Debit the Receiver
Credit the Giver
Real Account Debit What Comes in
Credit What goes out
Nominal Account Debit All Expenses & Loss
Credit All Incomes & Profit

खाते को व्यवहार के आधार पर निम्न चार भागों में विभाजित किया गया है।

1. सम्पत्ति (Assets)

2. दायित्व (Liabilities)

3. आय (Incomes)

4. व्यय (Expenses)

संगठन (Organization) = व्यापारिक संगठन दो या दो से अधिक व्यक्तियों का एक ऐसा समूह होता है, जिसका मुख्य उद्देश्य व्यापार द्वारा लाभ अर्जित करना है। व्यापारिक संगठन कई प्रकार के होते है कार्य और लेन-देन के आधार पर इन्है तीन भागों में विभाजित करते है।

1. सेवा संगठन

2. व्यापारिक संगठन

3. निर्माण कार्य संगठन

सेवा संगठन (service Organization)= कोई भी व्यापारिक संगठन, जो सेवाए प्रदान करता है, उसे सेना प्रदाता या सेवा संगठन कहते है। व्यापार में सेवा से तात्पर्य ऐसे कार्यों से है, जो पैसे के बदले में किए जाते है, जैसे शिक्षा प्रदान करना, चिकित्सा सेवा प्रदान करना आदि । सेवा संगठन के मुख्य तथ्य निम्न प्रकार है।

सेवा संगठन ग्राहक को उसकी आवश्यकतानुसार सेवाएं प्रदान करता है।

सेवाएं असीमित होती है, इसलिए सेवाओं का मूल्य सेवा संगठनों पर आधारित होता है। सेवा संगठन में सेवाएं प्रायः व्यक्तियों के द्वारा व्यक्तियों को ही प्रदान की जाती है। मशीनों के द्वारा दी गई सेवाएं इस संगठन के अन्तर्गत नही आती है।

सेवा संगठन में सेवाओं का प्रकार और उनका मूल्य सेवा संगठन पर ही आधारित होता है।

सेवा संगठन में ग्राहक और संगठन की ख्याति उसकी संपत्ति होती है।

सेवा संगठन की मुख्य आय उनके द्वारा दी गई सेवा का मुल्य होता है।

व्यापारिक संगठन (Trading Organisation ) = जो संगठन माल का क्रय-विक्रय करते है, व्यापारिक संगठन कहलाते है। अतः ट्रेडिंग का अर्थ एक निश्चित मूल्य पर माल का आदान-प्रदान करना है। व्यापारिक संगठन में व्यापारी माल खरीदता है और उसे एक चैनल के माध्यम से ग्राहक तक पहुचाता है। व्यापारिक संगठन के मुख्य तथ्य निम्न है।

1. व्यापारिक संगठन में व्यापारी माल का व्यापार करता है।

2. व्यापारिक संगठन में व्यापारी माल को ग्राहक तक पहुचाने का कार्य करता है।

3. माल का मूल्य निर्माण संगठन द्वारा तय किया जाता है।

4. व्यापारिक संगठन बाजार की मांग और ग्राहकों की संतुष्टि का आधार होता है।

व्यापारिक संगठन का मुख्य कार्य माल खरीदना और बेचना होता है। परचेज के अन्तर्गत एक व्यापारी किसी दूसरे व्यापारी से माल खरीदता है। यह माल ग्राहक की आवश्यकताओं या बाजार में उसकी मांग के आधार पर ही खरीदा जाता है। जबकि सेल्स के अन्तर्गत एक व्यापारी खरीदे गए माल को किसी दूसरे व्यापारिक संगठन या ग्राहक को बेचता है अर्थात व्यापारिक संगठन में व्यापारी माल को निर्माता से लेकर ग्राहक तक पहुचाने का कार्य करता है।

निर्माण संगठन (Manufacturing Organization) = निर्माण संगठन एक ऐसा संगठन है, जो माल का निर्माण करता है। इस संगठन में कच्चे माल को तैयार माल में ढाला जाता है। जिसे व्यापारिक संगठनों द्वारा ग्राहक तक पहुचाया जाता है। किसी भी निर्माण संगठन की सफलता माल की गुणवत्ता, मार्केट डिमाण्ड और लाभ पर निर्भर करती है। व्यापारिक संगठन निर्माण कार्य के आधार पर अलग-अलग है। निर्माण संगठन में कच्चे माल को एक प्रक्रिया के अन्तर्गत तैयार किया जाता है। सेवा संगठन की तुलना में निर्माण संगठन अधिक जटिल है निर्माण संगठन के मुख्य तथ्य निम्न प्रकार है।

1. निर्माण संगठन में माल का निर्माण किया जाता है।

2. निर्माण संगठन में माल का निर्माण बाजार की आवश्यकतानुसार किया जाता है।

3. निर्माण संगठन में सहायक  संगठनों से कच्चा माल खरीद कर उसे तैयार माल में ढाला  जाता है।

4. निर्माण कार्य एक निश्चित प्रक्रिया के अन्तर्गत किया जाता है।

                                                Chapter = 2

                                टैली की शुरुआत करना(Getting Start Tally)

टैली की शुरुआत करना(Getting Start Tally)= टैली की शुरुआत करने के लिए डेस्कटाँप पर बने टैली आइकन (Tally.ERP9) पर क्लिक करें, या स्टार्ट बटन पर क्लिक करके प्रोग्राम मैन्यू में जाए। यहाँ प्रोग्राम सूची से Tally.ERP9  डायरेक्ट्री सलेक्ट करके Tally.ERP9 आइकन पर क्लिक करें। इससे टैली कम्प्यूटर मेमोरी में लोड हो जायेगी। अब आप यहाँ से टैली में कार्य कर सकते है।

टैली स्टार्टअप स्क्रीन (Tally Startup Screen) = डेस्कटाँप पर बने Tally.ERP9  आइकन पर क्लिक करने के पश्चात टैली स्टार्टअप स्क्रीन प्रदर्शित होगी। इस स्क्रीन से आप Activate Licence  के द्वारा टैली साफ्टवेयर को अर्थाराइज कर सकते है। Existing Licence को काँन्फीगर कर सकते है। इसके अलावा Tally.NET यूजर को रिमोटली एक्सेस कर सकते है। यदि आपके पास Tally.ERP9  का लाइसेन्स नहीं है और टैली सिखना चाहते है तो tally.ERP9 के एजुकेशनल मोड का उपयोग कर सकते है।

एजुकेशनल मोड में कार्य करने के लिए टैली स्टार्टअप स्क्रीन से Work In Educational Mode आँप्शन सलेक्ट करें।

                                                चित्र- टैली स्टार्टअप स्क्रीन

Tally.ERP9 का एजुकेशनल मोड आपको एक स्थानीय मशीन पर कुछ बन्धनों सहित कार्य करने की अनुमति प्रदान करती है। इसका मुख्य उद्देश्य विधार्थियों को लाइसेन्स के बिना भी टैली सिखाना है। यहाँ से आप बाद में Tally.ERP9 साँफ्टवेयर के लाइसेन्स भी सक्रिय कर सकते है। ध्यान रहे की Tally.ERP9 साँफ्टवेयर के लाइसेन्स को काँन्फिगर करने के बाद स्टार्टअप स्क्रीन प्रदर्शित नही होगी।

टैली स्क्रीन कम्पोनेन्ट (Tally Screen Components) = Tally.ERP( लाँगिन करने के पश्चात टैली की मुख्य स्क्रीन (गेटवे आँफ टैली) प्रदर्शित होगी। गेटवे आँफ टैली , टैली का मुख्य भाग होता है, जहाँ से टैली को पूरी तरह कन्ट्रोल किया जाता है। गेटवे आँफ टैली को सामान्यतः तीन भागों में विभाजित किया गया है।

Work Area

Calculator

Button Bar

                                                चित्र – टैली स्टार्टअप स्क्रीन

वर्क एरिया (Work Area) = य़ह टैली का मुख्य एरिया होता है, जहाँ से टैली का संचालन होता है। वर्क एरिया को सक्रिय करने के लिए Ctrl+M  कुंजी का प्रयोग करें। वर्क एरिया दो भागों में विभाजित होता है।

Left Side Area

Right Side Area

Left Side Area = बाएं भाग में सबसे ऊपर कम्पनी की वर्तमान अवधि और तिथि होती है तथा थीक इसके नीचे सलेक्ट की हुई  कम्पनियों की सूची होती है। सूची में एक तरफ कम्पनी का नाम औऱ दूसरी तरफ वाउचर एन्ट्री की अन्तिम तिथि होती है।

Right Side Area =  दाएं भाग में टैली का कंट्रोल मेन्यू होता है। जिसके द्वारा चैली कंट्रोल किया जाता है।

कैलकुलेटर (Calculator) = टैली में एक आँनलाइन कैलकुलेटर भी होता है। जो इसकी प्रत्येक स्क्रीन पर उपलब्ध होता है। यहॉ से टैली में कार्य करते समय किसी भी प्रकार की गणना की जा सकती है। कैलकुलेटर को सक्रिय करने के लिए Ctrl +N  कुंजी का प्रयोग करें।

                              चित्र- टैली कैलकुलेटर

बाउचर में एन्ट्री करते समय कैलकुलेटर का प्रयोग करके ऑटो कैलकुलेशन कर सकते है। इसके लिए जब कर्सर लेजर के एमाउंट फील्ड में हो तो ALT + C  कुंजी दबाएं। इससे कर्सर Auto Value Calculator  में चला जायेगा। यहॉ गणना करने के बाद एंटर कुंजी दबाएं। जिससे गणना की हुई राशि स्वतः ही एमाउंट फील्ड में आ जायेगी।

बटन बार (Button Bar) =  बटन बार दो भागों में विभाजित होता है। एक हाँरिजाँन्टल भाग और दूसरा वर्टिकल भाग । गेटवे आँफ टैली पर स्थित बटन बार का वर्णन निम्न प्रकार है।

(1) Vertical Button Bar =  वर्टिकल बटन बार गेटवे ऑफ टैली के दाईं तरफ होता है। जिस पर विभिन्न प्रकार के बटन बने होते है। बटन बार प्रत्येक स्क्रीन पर सक्रिय रहता है। औऱ बटन स्क्रीन के अनुसार बदलते रहते है। वर्टिकल बटन बार का वर्णन निम्न प्रकार है।

F1: Select Cmp =  इस बटन का प्रयोग पहले से बनी हुई कम्पनी को सलेक्ट करने के लिए करते है। जिससे कम्पनी सलेक्ट की हुई कम्पनियों की सूची में आ जाती है। कम्पनी में कार्य करने के लिए उसे सलेक्ट करना आवश्यक है। इसे सलेक्ट करने के लिए F1  कुंजी का भी प्रयोग कर सकते है।

F1: Shut Cmp =  इस बटन का प्रयोग सलेक्ट की हुई कम्पनी को अनसलेक्ट करने के लिए करते है। कम्पनी को अनसलेक्ट करने के लिए Alt + F1  कुंजी का प्रयोग करते है।

F2: Date =  इस बटन का प्रयोग कम्पनी की करंट डेट बदलने के लिए करते है इसके लिए F2 कुंजी का प्रयोग  भी कर सकते है।

F2: Period =  इस बटन का प्रयोग कम्पनी के वित्तीय वर्ष को बदलने के लिए करते है। इसके लिए Alt + F2  कुंजी का प्रयोग भी कर सकते है।

F3: Company =  इस बटन का प्रयोग सलेक्ट की हुई कम्पनियों में से किसी एक कम्पनी को सक्रिय करने के लिए किया जाता है। यह बटन तभी कार्य करता है जब दो या दो से अधिक कम्पनियाँ सलेक्ट होगीं। इसके लिए F3 कुंजी का भी प्रयोग कर सकते है।

F3 : Company Info =  इस बटन का प्रयोग कम्पनी इन्फों मेन्यू प्रदर्शित करने के लिए करते है। इसके लिए Alt + F3  कुंजी का प्रयोग किया जाता है।

F4: Connect =  इस बटन का प्रयोग tally.NET में यूजर के रुप में रिमोटली डेटा एक्सेस करने के लिए किया जाता है। इसके लिए F4 कुंजी का प्रयोग कर सकते है। यह आँप्शन Tally.ERP9  के एजुकेशनल मोड में कार्य नही कर सकेगा.

F4: Disconnect =  इस बटन का प्रयोग कनेक्ट Tally.NET  यूजर को डिस्कनेक्ट करने के लिए किया जाता है। इसके लिए ALT + F4  कुंजी का प्रयोग कर सकते है। यह आँप्शन केवल तभी सक्रिय होगा जब आप पहले से ही Tally.NEt यूजर के रुप में कनेक्ट होगें।

F11: Features =  इस बटन का प्रयोग कम्पनी फीचर्स को लेट करने के लिए करते है। इसके लिए F11  कुंजी का प्रयोग भी कर सकते है।

F12: Configure =  इस बटन का प्रयोग टैली को काँन्फीगर करने के लिए करते है। जिससे उसे आवश्यकतानुसार सैट किया जा सके। इसके लिए F12  कुंजी का प्रयोग भी कर सकते है।

                                    चित्र – बटनबार

(2) Horizontal Button Bar =  हाँरिजोन्टल बटन बार गेटवे आँफ टैली के ऊपर होता हैजिस पर विभिन्न बटन बने होते है। यह बटव बार प्रत्येक स्क्रीन पर सक्रिय रहता है। यहॉ से आप टैली  की विभिन्न प्रक्रियाएं (जैसे- प्रिन्ट करना, मेल करना, डैटा एक्सपोर्ट करना. भाषा का चुनाव करना आदि) पूर्ण कर सकते है। हाँरिजोन्टल बटव बार पर बने बटनों रा वर्णन निम्न प्रकार है।

                                    चित्र- हाँरिजोन्टल बटनबार

P: Print = इस बटन का प्रयोग रिपोर्ट, स्टेटमेन्ट, वाउचर  आदि को प्रिन्ट करने के लिए करते है। यह बटन चुनी हुई टैली स्क्रीन के अनुसार सक्रिय निसक्रिय होता रहता है।

E: Export =  इस बटन का प्रयोग रिपोर्ट , स्टेटमेन्ट, वाउचर आदि के डेटा को एक्सपोर्ट करने के लिए करते है।

M: E-Mail =  इस बटन का प्रयोग रिपोर्ट, स्टेटमेन्ट, वाउचर आदि को ई-मेल के द्वारा भेजने के लिए करते है।

O:Upload =  इस बटन का प्रयोग रिपोर्ट, स्टेटमेन्ट, वाउचर आदि के डेटा को अपलोड करने के लिए करते है।

S: Shop =  इस बटन का प्रयोग  टैली साँफ्टवेयर को खरीदने व अपलोड करने के लिए करते है।

G: Language =  इस बटन का प्रयोग टैली की मुख्य भाषा सलेक्ट करने के लिए करते है। यहाँ से आप टैली को अलग-अलग भाषाओं में प्रदर्शित कर सकते है।

K: Control Centre  = इस बटन का प्रयोग Tally.NET  यूजर के कंट्रोल सेन्टर को सक्रिय करने के लिए करते है। tally.NEt  यूजर के रुप में रिमोटली डैटा एक्सेस करने के लिए E-mail ID औऱ Tally.NET Password  एंटर करें।

H: Support Centre = इस बटन का प्रयोग Tally.NET यूजर के लिए सपोर्ट सेन्टर को सक्रिय करने के लिए करते है। इसके लिए E-mail ID और Tally.NET Password  एंटर करें।

H: Help = इस बटन का प्रयोग टैली से सहायता प्राप्त करने के लिए करते है। यह सहायता आप दो प्रकार (आँनलाइन और आँफलाइन) से प्राप्त कर सकते है। आँनलाइन सहायता प्राप्त करने के लिए इन्टरनेट का होना आवश्यक है। और आँफ लाइन सहायता के लिए Tally.ERP9  डायरेक्ट्री में tallyerp9ref.chm फाइल का होना आवश्यक है।

बहुभाषी टैली (Multi Language Tally)=Tally. ERP9  एक मल्टी लैंग्वेज साँफ्टवेयर है इसे आप अलग-अलग भाषाओ में भी मैनेज कर सकते है। टैली में ये भाषाएँ आँपरेटिंग सिस्टम पर आधारित होती है। टैली में मुख्यतः अंग्रेजी भाषा का प्रयोग सर्वाधिक किया जाता है। क्योंकि यह भाषा सभी आँपरेटिंग सिस्टम में उपलब्ध रहती है। Tally.ERP9 में कई भाषाओं को शामिल किया गया है।

भाषा का चुनाव करना (Selection of Language)= भाषा का चुनाव करने के लिए होरिजोन्टल बटन बार पर बने G: Language बटन पर क्लिक करें। या Alt + G कुंजी का प्रयोग करें। इससे सभी भाषाओं की सूची प्रदर्शित होगी। इनमें से उस भाषा का चुनाव करें जिसमें कार्य करना चाहते है। इससे टैली चुनी गई भाषा के अनुरुप ही प्रदर्शित होगी।

                        चित्र-टैली में भाषा का चुनाव करना

कीबोर्ड की भाषा (Keyboard Language) =  किसी भी भाषा का चुनाव करने के बाद टैली में सभी रिपोर्ट , फाँर्म आदि चुनी गई भाषा में ही प्रदर्शित होंगे। यदि आप कम्पनी डेटा को किसी अन्य भाषा में प्रदर्शित करना चाहते है, तो की बोर्ड के लिए अलग भाषा का चुनाव कर सकते है। इससे टैली में एंटर किए गए डेटा चुनी गई भाषा में प्रदर्शित होंगे । इस प्रकार आप एंटर किए गए डेटा को अलग भाषा में प्रदर्शित कर सकते है। कीबोर्ड की भाषा का चुनाव करने के लिए K: Keyboard बटन पर क्लिक करें।

बहुभाषी मास्टर बनाना (Create Multi Language Master)  = टैली में एक ही मास्टर को एक से अधिक भाषाओं में तैयार कर सकते है। इसके लिए F12 कुंजी दबाकर “Allow Language ALIASES Along with Names ” ऑप्शन को येस सैट करें। अब एक से अधिक भाषाओं में मास्टर बनाने के लिए उपयुक्त भाषा का चुनान करें।

बहुभाषी वाउचर एन्ट्री (Multi Language Voucher Entry)  = वाउचर एन्ट्री में एक साथ एक से अधिक भाषाओं के लेजर को एंटर कर सकते है। इसके लिए लेजर बनाते समय कीबोर्ड भाषा का चुनाव करें। इससे लेजर सलेक्ट की गई भाषा में ही तैयार होगा। वाउचर एन्ट्री करते समय लेजर उसी भाषा में प्रदर्शित होगा जिस भाषा में उसे तैयार किया गया है। इस प्रकार एक वाउचर एन्ट्री में बहुभाषी खातों को शामिल कर सकते है।

बहुभाषी रिपोर्ट (Multi Language Report) = Tally.ERP9  एक बहुभाषी साँफ्टवेयर है इसलिए रिपोर्ट को किसी भी भाषा में प्रदर्शित किया जा सकता है। रिपोर्ट को किसी अन्य भाषा में प्रदर्शित करने के लिए बटन बार पर बने G: Language   बटन पर क्लिक करें और उपय्क्त भाषा का विकल्प चुनें। इससे रिपोर्ट चुनी हई भाषा में ही प्रदर्शित होगी।

बहुभाषी रिपोर्ट प्रिन्ट करना (Print Multi Language Report) =  किसी भी रिपोर्ट को सलेक्ट की गई भाषा के अलावा अन्य भाषाओं में प्रिन्ट करने के लिए बटन बार पर बने P: Print बटन पर क्लिक करें। इससे प्रिन्ट स्क्रीन प्रदर्शित होगी। इस स्क्रीन के बटन बार पर बने L: Print Language  बटन पर क्लिक करें और वह भाषा सलेक्ट करें जिसमें रिपोर्ट प्रिन्ट करना चाहते है। इससे रिपोर्ट चुनी गई भाषा में प्रिन्ट होगी।

टैली फाँनेटिक कीबोर्ड (Tally Phonetic Keyboard) =  टैली फानेटिक कीबोर्ड सभी भाषाओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। किसी भी भाषा को बोला तो जा सकता है, लेकिन कीबोर्ड के माध्यम से उसे टाइप नही किया जा सकता है। उसे कम्प्यूटर में टाइप करने के लिए किसी माध्यम का सहारा लिया जाता है। यह माध्यम अलग-अलग भाषाओं के लिए अलग-अलग फाँण्ट होता है।

टैली में किसी भी भाषा को टाइप करने के लिए एक ही माध्यम अपनाया गया है। यह माध्यम भाषा के उच्चारण पर आधारित होता है। की बोर्ड को ले-आउट अंग्रेजी भाषा के शब्दों के अनुसार होता है। इसलिए टैली में किसी भी भाषा में टाइप करने के लिए अंग्रेजी भाषा के सब्दो का ही प्रयोग किया जाता है। टाइप किए गये शब्दों को टैली चुनी हुई भाषा में स्वचः ही रुपान्तरित करती है। उदाहरण के लिए purchase को किसी भी भाषा में प्रदर्शित करने के लिए parachej टाइप करें। टैली फोनेटिक कीबोर्ड के कुछ मुख्य उदाहरण इस प्रकार है।

                                                chapter = 4

कम्पनी बनाना (creat Company)

नई कम्पनी बनाना (Creat a New Company) = टैली में कम्पनी बनाने के लिए कम्पनी इन्फो मैन्यू (Alt+F3) में जाकर Creat Company चुनें। यदि आप पहली बार टैली में कार्य कर रहे है, तो इसके लिए सबसे पहले कम्पनी बनानी होगी। टैली इंस्टाँल करने के बाद स्वतः ही कम्पनी इन्फो मैन्यू प्रदर्शित होगा। यहाँ से आप पहली बार टैली में कम्पनी बनाएंगे।

यदि टैली में पहले से ही कोई कम्पनी बनी हुई है, तो इसमें लाँगिन करते ही गेटवे आँफ टैली प्रदर्शित होगा। नई कम्पनी बनाने के लिए गेटवे आँफ टैली में Alt+F3 कुंजी का प्रयोग करके Create Company  आँप्शन सलेक्ट करें। इससे कम्पनी क्रिएशन स्क्रीन प्रदर्शित होगी। यह स्क्रीन मुख्यतः दो भागों में विभाजित होती है। इसमें उपरी भाग कम्पनी पर्टूकुलर्स तथा निचला भाग बेस करेंसी कहलाता है। नई कम्पनी बनाने के लिए कम्पनी क्रिएशन स्क्रीन में सूचनाएं निम्न प्रकार एंटर करें।

Directory = यह फील्ड पहले से ही भरा हुआ होता है। इस फील्ड में टैली का वह पाथ होता है, जहाँ टैली साँफ्टवेयर लोड होता है। कर्सर इस फील्ड को छोड़ देता है। और बनाई जाने वाली कम्पनी स्वतः ही इस डायरेक्ट्री में स्टोर हो जाती है। यदि आप कम्पनी को अन्य डायरेक्ट्री में स्टोर करना चाहते है, तो बैकस्पेस कुंजी दबाकर वह पाथ एंटर करें। जहाँ कम्पनी स्टोर करना चाहते है।

Name = यह एक आवश्यक फील्ड होता है। इस फील्ड में वह नाम एॆटर करें, जिस नाम से कम्पनी बनाना चाहते है। यह नाम टैली की सभी आंतरिक व बाह्य रिपोर्ट्स में प्रदर्शित होगा।

Mailing Name =  इस फील्ड में कम्पनी को मेलिंग नेम एंटर करें। सामान्यतः कम्पनी का नाम ही उसका मेलिंग नेम होता है। यदि कम्पनी का मेलिंग नेम इसके नाम से भिन्न है, तो इसे बदला भी जा सकता है। मेलिंग नेम बदलने के लिए इसे हटाकर नया मेलिंग नेम एंटर करें। इस फील्ड में एंटर की गई सूचनाएं सभी बाह्य रिपोर्ट्स में प्रदर्शित होगी।

Address =  इस फील्ड में कम्पनी का पूरा पता एंटर करें। इसे एक से अधिक पंक्तियों में भी एंटर कर सकते है। इस फील्ड में एंटर की गई सूचनाएं सभी बाह्य रिपोर्टस में प्रदर्शित होगी। अगले फील्ड में जाने के लिए खाली पंक्ति से एंटर कुंजी दबाएं।

Country =  इस फील्ड में कर्सर के आते ही एक सूची प्रदर्शित होगी। इस सूची से वह देश सलेक्ट करें जिस देश में कम्पनी स्थापित है। यदि आप इंडिया के अलावा किसी अन्य देश का चुनाव करते है तो राज्य , पिन कोड और टेलीफोन नम्बर फील्ड प्रदर्शित नही होंगे। कम्पनी की करेंसी सिम्बल भी इसी के अनुसार प्रदर्शित होगा।

State =  इस फील्ड में कर्सर के आते ही एक सूची प्रदर्शित होगी। इस सूची में सभी राज्यों के नाम होते है। इनमें से उस राज्य का चुनाव करें जिस राज्य में कम्पनी स्थापित है। यदि आप राज्य का चुनाव नही करना चाहते है तो Not applicable ऑप्शन सलेक्ट करें। यह सूची तभी प्रदर्शित होगीजब आप उपरोक्त फील्ड में इंण्डिया सलेक्ट होगा।

PinCode =  इस फील्ड में उस स्थान का पिन कोड एंटर करें, जहाँ कम्पनी स्थापित है।

Phone No =  इस फील्ड में कम्पनी का टेलीफोन नंबर एंटर करें।

 Mobile No =  इस फील्ड में मोबाइल नंबर एंटर करें।

Fax No =  यदि कम्पनी का फैक्स नम्बर उफलब्ध है, तो उसे इस फील्ड में इंटर करें अन्यथा इसे खाली छोड़ दें।

E-Mail =  यदि कम्पनी का ई-मेल एड्रेस है तो उसे इस फील्ड में एंटर करें अन्यथा इसे खाली छोड़ दे। इस फील्ड में एंटर किया गया ई-मेल एड्रैस सभी बाह्य रिपोर्ट्स में प्रदर्शित होगा।

Website = यदि कम्पनी का वेबसाइट है, तो उसे इस फील्ड में एंटर अवश्य करें अन्यथा इसे खाली छोड़ दें। यह सभी रिपोर्ट्स में प्रदर्शित होगा।

Financial Year Begins From =  इस फील्ड में वित्तीय वर्ष शुरु होने की तिथि एंटर करें। सामान्यतः वित्तीय वर्ष एक अप्रैल से शुरु और 31 मार्च को समाप्त होता है। इसलिए इस फील्ड में वित्तीय वर्ष आरंभ होने की तिथि  1.4.2017 जैसे रुप में एंटर करें।

Books Begining From =  इस फील्ड में बुक्स आँफ एकाउंट्स शुरु करने की तिथि एंटर करें। सामान्यतः बुक्स ऑफ एकाउंट्स शुरु करने की तिथि वही होती है। जो वित्तीय वर्ष शुरु होने की होती है। इसलिए उपरोक्त फील्ड  में एंटर की गई तिथि स्वतः ही इस फील्ड में आजाती है। बुक्स ऑफ एकाउंट्स शुरु करने की तिथि बदल सकते है। लेकिन यह तिथि वित्तीय वर्ष शुरु होने के 365 दिन के अंदर ही हो.नी चाहिए। उदाहरण स्वरुप यदि वित्तीय वर्ष 1.4.2017 से शुरु करते है, तो बुक्स ऑफ एकाउंट्स शुरु करने की तिथि 1.4.2017 से 31.3.2018 मध्य होगी।

Tally Vault Passward =  यदि आप कम्पनी के डेटा को अनक्रेप्टिड फाँर्म (।।******।।) में परिवर्तित कर उसे पासवर्ड के द्वारा सुरक्षित करना चाहते है। तो इस फील्ड में पासवर्ड एंटर करें। बाद में कम्पनी को खोलने के लिए इसी पासवर्ड का प्रयोग करें।

Security Control =  यदि  आप कम्पनी पर सुरक्षा व्यवस्था सक्रिय करना चाहते है। तो इस ऑप्शन को यश करें। इसे यश करने के बाद उपयुक्त यूजर नेम और पासवर्ड एंटर करें।

Use Tally Audit Features =  कम्पनी में टैली आँडिट ऑप्शन को सक्रिय करने के लिए इस ऑप्शन को यश करें।

Disallow Opening in Educational Mode =  उपरोक्त कम्पनी को टैली के Educational Mode  में भी खोलने के लिए इस ऑप्शन को यश सैट करें।

.Basic Accounting

Basic concept of accounting

Accounting: It is an art of recording, classifying and summarizing in significant manner and in terms of money, transactions and events which are of financial character and interpreting the results thereof.

Business transaction: A business transaction is “The movement of money and money’s worth form one person to another”. Or exchange of values between two parties is also known as “Business Transaction”.

Purchase:        A purchase means goods purchased by a businessman from suppliers.

Sales:               Sales is goods sold by a businessman to his customers.

Purchase Return or Rejection in or Outward Invoice:

Purchase return means the return of the full or a part of goods purchased by the businessman to his suppliers.

Sales Return or Rejection out or Inward Invoice:    Sales return means the return of the full or a part of the goods sold by the customer to the businessman.

Assets: Assets are the things and properties possessed by a businessman not for resale but for the use in the business.

Liabilities:       All the amounts payable by a business concern to outsiders are called liabilities.

Capital:           Capital is the amount invested for starting a bDebtors:          Debtor is the person who owes amounts to the businessman.

Creditor:         Creditor is the person to whom amounts are owed by the businessman.

Debit:              The receiving aspect of a transaction is called debit or Dr.

Credit:                        The giving aspect of a transaction is called credit or Cr.

Drawings:       Drawings are the amounts withdrawn (taken back) by the businessman from his business for his personal, private and domestic purpose. Drawings may be made in the form cash, goods and assets of the business.

Receipts:         It is a document issued by the receiver of cash to the giver of cash acknowledging the cash received voucher.

Account:         Account is a summarized record of all the transactions relating to every person, every thing or property and every type of service.

Ledger:           The book of final entry where accounts lie.

Journal entries:          A daily record of transaction.

Trail Balance: It is a statement of all the ledger account balances prepared at the end of particular period to verify the accuracy of the entries made in books of accounts.

Profit: Excess of credit side over debit side.

Profit and loss account:          It is prepared to ascertain actual profit or loss of the business.

Balance Sheet:            To ascertain the financial position of the business. It is a statement of assets and liabilities.

Types of accounts

Personal account:       Personal accounts are the accounts of persons, firms, concerns and institutions which the businessmen deal.

Principles:                                           Debit the receiver

Credit the giver

Real Account:             These are the accounts of things, materials, assets & properties. It has physical existence which can be seen & touch.

Ex. Cash, Sale, Purchase, Furniture, Investment etc.

Principles:                                           Debit what comes in

Credit what goes out

Nominal account:       Nominal account is the account of services received (expenses and Losses) and services given (income and gain)

Ex. Salary, Rent, Wages, Stationery etc.

Principles:                                           Debit all expense/losses

Credit all income/ gains

Tally 7.2

Tally is a complete business solution for any kind of Business Enterprise. It is a full fledged accounting software.

Procedure for creating company in Tally

Double click on Tally icon on desktop. Alt+F3 Company info-Create company.

Accounts Only: To maintain only the financial accounts of the company. Inventory (stock) management is not involved in it.

Account with Inventory:      This is the default option, which allows maintaining both the financial account of the company as well as the inventory of the company.

Select Company:       We can choose the company which is already created.

Shortcut key – F1.

Shut Company:         It is used to close the company which is opened. Shortcut key – Alt+F1.

Alter:              It is used to make alterations in the company creation like name, date, maintain etc.

Quit:            Exits from Tally. 1. Click on quit button.

  1. Esc, Esc, Esc and enter.
  2. Ctrl+Q

Short cut keys

Alt+F3                        Company information menu

Enter                           To accept information typed into a field.

To accept a voucher or master.

To get a report with further details of an item in a report.

Esc                              To remove what has been typed into a field.

To exit a screen.

To indicate you do not want to accept a voucher or master.

Ctrl+A                         To accept a form wherever you use the key combination the screen or report will be accepted as it is on this screen.

Ctrl+Q                         It quits the screen without making any changed to it.

Alt+C                          To create a master at a voucher screen.

When working within an amount field presses Alt+C to act as a calculator.

Alt+D                          To delete a voucher.

To delete a master.

Ctrl+Enter                   To alter a master while making an entry or viewing report.

F2                                Date

Alt+F2                        Change period

Alt+F1                        To see detail

F11                              Features company

F12                              Configuration options are applicable to all the companies in a data directory.

Ctrl+N             Calculator screen.

Ctrl+V             Voucher mode (Cr. Dr)

Invoice mode (name of item, rate, quantity, and amount)

Gateway of tally-Accounts info-Group

Bank account                                                                    Bank  Account

Bank Od account                                                              Branch/division

Capital account                                                                 Cash in hand

Current asset                                                                     Current liability

Deposit                                                                              Direct expenses

Direct income                                                                    Indirect expense

Indirect income                                                                 Duties and tax

Fixed asset                                                                                    Investment

Loans and advance                                                           Loan (liability)

Miscellaneous expenses                                                    Provisions

Retained earning                                                               Reserves and surplus

Purchase account                                                              Sales account

Secured loan                                                                     Stock in hand

Sundry debtor’s                                                                Sundry creditors

Suspense                                                                           Unsecured account

Meaning:

Current asset:

It is converted into cash with in a year. Ex. Bills receivable

Direct expenses:

These are the expenses which are directly related to manufacturing of goods.

Ex. Wages, factory rent, heating, lighting etc

Indirect expense:

These are the expenses which are indirectly related to manufacturing of goods.

Ex. Salary, rent, stationery, advertisement, printing

Depreciation:                         Decrease the value of the asset.

Sundry debtors:                    The person who is the receiver or customer

Sundry creditors:      The person who gives or supplier.

Expenses Outstanding or Unpaid expenses or Expenses due:

Expenditure incurred during current year but the amount on which is not yet paid. (Added to the expenditure on the debit side and entered on the liability side.)

Income received in advance or Income received but not earned

Income received during the current year but not earned or a part of which relates to the next year. (Deducted form the concerned income on the credit side and entered on the liability side)

Prepaid advance or Expenses or Prepaid expenses

Expenditure paid during current year but not incurred or a part of which relates to the next year is called expenditure prepaid. (Deducted form the concerned expenditure on the debit side and entered on the assets side)

Income outstanding or income earned but not received or Income accrued

Income outstanding means income earned during the current year but the amount on which is not yet received (added to the concerned income on the credit side and entered on the asset side)

Gateway of Tally-Accounts info-ledger-create

Ledger Group
Opening stock Stock in hand
Purchase Purchase account
Purchase return Purchase account
Fright charges Direct expenses
Carriage inwards or Purchases Direct expenses
Cartage and coolie Direct expenses
Octroi Direct expenses
Manufacturing wages Direct expenses
Coal, gas, water Direct expenses
Oil and fuel Direct expenses
Factory rent, insurance, electricity, lighting and heating Direct expenses
Sales Sales account
Salary Indirect expenses
Postage and telegrams Indirect expenses
Telephone charges Indirect expenses
Rent paid Indirect expenses
Rates and taxes Indirect expenses
Insurance Indirect expenses
Audit fees Indirect expenses
Interest on bank loan Indirect expenses
Interest on loans paid Indirect expenses
Bank charges Indirect expenses
Legal charges Indirect expenses
Printing and stationery Indirect expenses
General expenses Indirect expenses
Sundry expenses Indirect expenses
Discount allowed Indirect expenses
Carriage outwards or sales Indirect expenses
Traveling expenses Indirect expenses
Advertisement Indirect expenses
Bad debts Indirect expenses
Repair renewals Indirect expenses
Motor expenses Indirect expenses
Depreciation on assets Indirect expenses
Interest on investment received Indirect income
Interest on deposit received Indirect income
Interest on loans received Indirect income
Commission received Indirect income
Discount received Indirect income
Rent received Indirect income
Dividend received Indirect income
Bad debts recovered Indirect income
Profit by sale of assets Indirect income
Sundry income Indirect income
Loan from others Loan Liabilities
Bank loan Loan  Liabilities
Bank o,verdraft Bank OD
Bills payable Current Liabilities
Sundry creditors Sundry creditors
Mortgage loans Secured loans
Expense outstanding Current Liabilities
Income received in advance Current Liabilities
Other liabilities Current  Liabilities
Capital Capital account
Drawings Capital account
Cash in hand Cash in hand
Cash at bank Bank account
Fixed deposit at bank Deposit
Investments Investments
Bills receivable Current asset
Sundry debtors Sundry debtors
Closing stock Stock in hand
Stock of stationery Current asset
Loose tools Fixed asset
Fixtures and fittings Fixed asset
Furniture Fixed asset
Motor vehicles Fixed asset
Plant and machinery Fixed asset
Land and building Fixed asset
Leasehold property Fixed asset
Patents Fixed asset
Goodwill Fixed asset
Prepaid expenses Current asset
Income outstanding Current assset

Trading account: Buying and selling of goods.

Dr.                     Receiving aspect                                                                    Giving aspect    Cr.

Direct expenses Amount Direct Income Amount
To Opening stock xxx By Sales xxx
To Purchases xxx By (-)Sales return xxx
To (-)purchase return xxx By Closing stock xxx
To Freight charges xxx
To Cartage and coolie xxx
To Lorry hire xxx
To Manufacturing expenses xxx
To Wages xxx
To Factory rent, fuel power xxx
To Gross profit (transfer to profit and loss account) xxx

To Profit and loss account: Actual profit and loss of the business

Indirect expenses or payments Amount Indirect income or receipts Amount
To Salary xxx By Gross profit xxx
To Postage and Telegram xxx By Interest on investment received xxx
To Telephone charges xxx By Interest on deposit received xxx
To Rent paid xxx By Interest on loans received xxx
To Rate and taxes xxx By Discount received xxx
To Insurance paid xxx By Discount received xxx
To Interest on bank loan xxx By Rent received xxx
To Bank charges xxx By Bad debts received xxx
To Printing and stationery xxx By Net loss xxx
To Discount allowed xxx
To Advertisement
To Carriage outward (sales)
To Depreciation on assets
To General expenses
To Traveling
To Bad debts
To Net profit

Balance sheet: Actual financial position

Liabilities Amount Assets Amount
Bank loan xxx Cash in hand xxx
Bank overdraft xxx Cash at bank xxx
Bills payable xxx Fixed deposit at bank xxx
Sundry creditors xxx Investments xxx
Expenses outstanding xxx Bills receivable xxx
Capital xxx Sundry debtors xxx
(-)drawings xxx Closing stock xxx
Net profit xxx Stock of stationery xxx
Furniture xxx
Plant machinery xxx
Land and building xxx
Motor vehicles xxx
Prepaid expenses xxx
Income outstanding xxx

Alt+F3 Company Creation

Gateway of tally-Accounting voucher

F4        Contra:            Records funds transfer between cash and bank accounts.

Deposit into bank or Opened bank account   Cr. Cash

Dr. Bank

Withdraw form bank                                      Cr. Bank

Dr. Cash

F5        Payment:         Record all bank and cash payments.

Paid or Give                            Dr.

Cr. Cash/bank (in case cheque)

F6        Receipt:        Records all receipts into bank or cash accounts.

Received or Borrow or Take   Cr.

Dr. Cash/bank (in case cheque)

F7        Journal:            Records adjustments between ledger accounts.

F8        Sales:               Records all sales.

Dr. Cash/party (incase of credit-party)

Cr. Sales

F9        Purchase:         Records all purchase.     Cr. Cash/party (incase of credit-party)                                                                                                          Dr. Purchase

Journalize the following transactions

  1. Commenced business with cash Rs.10, 000.
  2. Deposit into bank Rs. 15,000
  3. Bought office furniture Rs.3,000
  4. Soled goods for cash Rs.2,500
  5. Purchased goods form Mr X on credit Rs.2,000
  6. Soled goods to Mr Y on credit Rs.3,000
  7. Received cash form Mr. Y on account Rs.2,000
  8. Paid cash to Mr X Rs. 1,000
  9. Received commission Rs. 50
  10. Received interest on bank deposit Rs. 100
  11. Paid into bank Rs. 1,000
  12. Paid for advertisement Rs.500
  13. Purchased goods for cash Rs. 800
  14. Sold goods for cash Rs. 1,500
  15. Paid salary Rs. 500

Gateway of tally-Account info-Ledger-Create

Gateway of tally – Accounting voucherv

Sl.No Key Voucher Ledger Group Type of account Principles Amount
1 F6 Receipt Cr. Capital Capital account Personal Giver 10,000
Dr. Cash Cash in hand Real Comes in 10,000
 2 F4 Contra Cr. Cash Cash in hand Real Goes out 15,000
Dr. Bank Bank account Real Comes in 15,000
3 F5 Payment Dr. Office furniture Fixed asset Real Comes in 3,000
Cr. Cash Cash in hand Real Goes out 3,000
4 F8 Sales Dr. Cash Cash in hand Real Comes in 2,500
Cr. Sales Sales account Real Goes out 2,500
5 F9 Purchase Cr. X Sundry creditor Personal Giver 2,000
Dr. purchase Purchase account Real Comes in 2,000
6 F8 Sales Dr. Y Sundry debtors Personal Receiver 3,000
Cr. Sales Sales account Real Goes out 3,000
7 F6 Receipt Cr. Y Giver 2,000
Dr. cash Cash in hand Real Comes in 2,000
8 F5 Payment Dr. X Receiver 1,000
Cr. Cash Cash in hand Real Goes out 1,000
9 F6 Receipt Cr. commission Indirect income Nominal Credit all income 50
Dr. cash Cash in hand Real Comes in 50
10 F6 Receipt Cr. Interest on bank deposit Indirect income Nominal Credit all income 100
Dr. Bank Bank account Real Comes in 100
11 F4 Contra Cr. Cash Cash in hand Real Goes out 1,000
Dr. Bank Bank account Real Comes in 1,000
12 F5 Payment Dr. Advertisement Indirect expenses Nominal Debit all expenses 500
Cr. Cash Cash in hand Real Goes out 500
13 F9 Purchase Cr. Cash Cash in hand Real Goes out 800
Dr. purchase

Cr cash

Purchase account Real Comes in 800
14 F8 Sales Dr. cash Cash in hand Real Comes in 1,500
Cr. Sales Sales account Real Goes out 1,500
15 F5 Payment Dr. salary Indirect expense Nominal Debit all expenses 500
Cr. Cash Cash in hand Real Goes out 500

To view-         Gateway of tally-Accounts info-Ledger-Multiple ledger Alter-All items      (for ledger)

Gateway of tally-Display-Day book-Alt+F1 (to see detail)               (Accounting Voucher)

Inventory information

Alt+F3 Company creation-Maintain-Accounts with inventory

Gateway of Tally-Inventory information-Unit of measure

Gateway of tally –Inventory information-Godown

Gateway of tally-Inventory information-Stock group

Gateway of tally – Inventory information-Stock item

To View

Gateway of tally-Display-Day book-Alt+F2 (change period) Alt+F1 (to see detail)                        or

Gateway of tally-Stock summary

  1. On 1-4-06 Raman commenced business with cash of Rs. 25,00,000. He further introduced Land and    Building costing Rs. 30,000, Plant and Machinery costing Rs. 25,000 and furniture and fixture costing Rs. 36,000.
  1. On 2-4-06 Purchased Vehicle and Patents Rs. 20,000 and Rs. 15,000.
  1. On 5-4-06 He deposited Rs. 1, 00,000 into Canara Bank.
  1. On 6-4-06 Purchased from Cadbury Company

500      5 Stars @  Rs. 5                      1000    Cadbury @ Rs. 5

100      Kit kat @ Rs. 4                       200      Dairy milk @ Rs. 7

  1. On 10-4-06 Purchased from Paras

500            Moov @ Rs. 20

500            D’Clod @ Rs. 12

  1. On 13-4-06 Sold to Pankaj

200            Moov @ Rs. 20.50

100            D’Clod @ Rs. 12.25

200            Adhensive tape roll @ Rs. 15.25

100            Band Aid box @ Rs. 252

200            Boric Acid powder @ Rs.14

  1. On 15-4-06 Sold to Akbar

500            Cadbury @ Rs. 6

200            5 Star @ Rs.5.25

50                Kit Kat @ Rs. 6

  1. On 16-4-06 Paid to Cadbury company Rs.
  1. On 18-4-06 Received from Pankaj
  1. On 20-4-06 Paid to Paras Rs.
  1. On 25-4-06 Received from Akbar Rs.
  1. On 26-4-06 Purchase from Well Cloth

T-Shirts           Lee-25Pc-Rs.200

Nike-30Pc-Rs.300

Formal Shirts   Pan America-35Pc-400

Peter England-30Pc-450

Jeans Pants      Tiger-20Pc-500

Ruff and Tuff-30Pc-350

Cotton Pants   Arrow-40Pc-200

Ex-Calibar-20Pc-250

  1. Paid Postage Rs. 500 by cheque
  2. Received commission Rs. 15,000
  3. Paid wages Rs. 2,500

Procedure for Inventory Problem

Gateway of Tally-Inventory Info-Unit of Measure-Create-

Symbol-           Nos.     Pcs

Formal Name-Number            Pieces

Gateway of Tally-Inventory Info-Stock Group-Create

Chocolate, Medicines, Cotton Pants, Jeans Pants, Formal Shirts, T-Shirts

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5 Stars

Kitkat                                                  Chocolate

Cadbury

Dairy milk

Moov

D’Clod

Adhensive tape rolls                           Medicines

Band Aid box

Boric Acid powder

Lee                                                      T-Shirts

Nike

Pan America                                        Formal Shirts

Peter England

Tiger                                                    Jeans Pants

Ruff and Tuff

Arrow

Ex-Calibar                                           Cotton Pants

Journalize the following Transactions using the debit and credit given     by the American accounts

  1. Commenced business with cash                                                    10,000
  2. Deposited into bank                                                                        5,000
  3. Purchased goods for cash                                                               3,000
  4. Sold goods for cash                                                                        2,500
  5. Purchased goods from A on credit                                                 4,000
  6. Sold goods to B on credit                                                                            4,500
  7. Withdraw from bank                                                                      3,000
  8. Paid A on account                                                                                      2,000
  9. Received from B on account                                                          2,500
  10. Took loan from C                                                                              5,000
  11. Gave loan to D                                                                                  4,000
  12. Paid salary                                                                                         1,000
  13. Cash withdraw from the business for personal use                             200
  14.                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                Rent paid to E                                                                                    1,000
Ledger Group
Capital Capital Account
Cash Cash in hand
Bank Bank account
Purchase Purchase account
Sales Sales account
A Sundry creditor
B Sundry debtor
C Sundry creditor
D Sundry debtor
Salary Indirect expenses
Drawings Capital account
Rent Indirect expenses

Rakesh  and company

  1. Started business with cash Rs. 2,000, Bank Rs. 20,000.
  2. Issued cheque for goods purchased Rs. 1,000.
  3. Bought goods for cash  Rs.8,000.
  4. Bought furniture from Anil for cash Rs.100.
  5. Bought goods from harish Rs. 1,500.
  6. Bought goods from chandan on credit Rs. 5,800.
  7. Returned damaged goods to Chandan Rs.800.
  8. Bought goods from Naveen and paid by cheque immediately Rs.400.
  9. Sold goods to Guptha Rs. 1,000.
  10. Received a cheque from Guptha Rs.1,000 for goods sold.
  11. Paid commission Rs.2,000.
  12. Paid wages by cheque Rs.4,000.
  13. Draw cheque for personal use Rs.4,000.
  14. Draw cash for personal use from bank Rs.3,000.
  15. Receive a cheque from Manju Rs.2,800.
  16. Borrow loan from Anands Rs.1,000.
  17. Paid Anands Loan with interest Rs.1,000.
Ledger Group
Capital Capital account
Bank Bank account
Purchase Purchase account
Anil Sundry Creditor
Chandan Sundry Creditor
Harish Sundry Creditor
Purchase return Purchase account
Naveen Sundry Creditor
Sales Sales account
Guptha Sundry debetor
Commission Indirect expenses
Wages Direct expenses
Drawings Capital account
Manju Sundry Creditor
Anand Sundry Creditor

Haridas and company

1.Started business with cash Rs.10,000,furniture Rs.4,000 and machinery Rs.5,000.

2.Bought goods from Anil on credit Rs. 4,000 and for cash Rs.5,000.

3.Sold goods to Rajesh on credit Rs.5,000 and for cash Rs.3,000.

  1. Bought goods from Arun Subject to trade discount of 2% of Rs.2,000.
  2. Sold goods to Ramesh subject to trade discount of 5% of Rs.4,000.
  3. Paid salary Rs.1,000, printing Rs.150 and wages rs.100.

7.Received rent Rs.500, commission Rs.400.

  1. Received a cheque from Ganesh Rs.1,000.
Ledger Group
Capital Capital account
Furniture Fixed asset
Machinery Fixed asset
Purchase Purchase account
Anil Sundry Creditor
Sales Sales account
Rajesh Sundry debtor
Arun Sundry creditor
Ramesh Sundry debtor
Salary Indirect expenses
Printing Indirect expenses
Wages Direct expenses
Rent Indirect expenses
Commission Indirect expenses
Ganesh Sundry creditor
Trade discount Indirect expenses

Memorandum book

Particulars

  1. Commenced business with cash Rs. 10,000.
  2. Purchased goods for cash Rs.3,000.
  3. Opened a bank  account with Rs.2,000.
  4. Purchased stationary Rs.1,00.
  5. Purchased furniture Rs.1,000.
  6. Sold goods to A Rs.2,000.
  7. Purchased goods from B Rs.2,000.
  8. Sold goods for cash Rs.1,000.
  9. Paid for postage Rs.20.
  10. Took loan from C Rs.1,500.
  11. Paid rent Rs.300.
  12. Withdraw from bank Rs.800.
  13. Received from A on account Rs.500.
  14. Paid commission by cheque Rs.200.
Ledger Group
Capital Capital account
Purchase Purchase account
Bank Bank account
Purchase Purchase account
Stationary Indirect expenses
Furniture Fixed asset
Sales Sales account
A Sundry debtor
B Sundry Creditor
Potage Indirect expenses
C Sundry Creditor
Rent Indirect expenses
Commission Indirect expenses

Roa and company

Particulars                                                                    Rs.

  1. Bought goods for cash                                            2,500
  2. Bought office furniture for cash                               500
  3. Paid for postage                                                            10
  4. Purchased goods from Rajkamal                           2,000
  5. Sold goods for cash                                                    150
  6. Bought goods from Rahim                                        400
  7. Sold goods to Suresh                                                 400
  8. Sold goods to Nayak                                                  250
  9. Purchased goods for cash                                          400
  10. Recevied cash from Nayak                                      200
  11. Paid cash to Rahim                                                     50
  12. Returned goods to Ralkamal                                  200
  13. Suresh returned goods                                               50
  14. Paid salary                                                                150
  15. Sold goods for cash                                                 500
  16. Rao withdraw for his personel use                         800
  17. Paid for stationery                                                    100
  18. Paid rent                                                                      50
  19. Received commission                                              225
Ledger Group
Capital Capital account
Purchase Purchase account
Postage Indirect expenses
Rajkamal Sundry Creditor
Sales Sales account
Rahim Sundry Creditor
Suresh Sundry Debtor
Nayak Sundry Debtor
Purchase returns Purchase account
Salary Indirect expenses
Drawings Capital account
Stationary Indirect expenses
Rent Indirect expenses
Commission Indirect income

Ledger Grouping in TAlly

A/C. A/C. GROUP
Bills Payable Current Liabilities
Bills Receivable Current Assets
Inward Carriage Direct Expenses
Outward Carriage Indirect Expenses
Purchase Purchase A/c.
Purchase Return Purchase A/c.
Sales Sales A/c.
Sales Return Sales A/c.
Drawing Capital
Motor Car Fixed Assets
Furniture Fixed Assets
Vehicle Fixed Assets
Discount Received Income Revenue
Discount Payable Indirect Expenses
Railway Freight Direct Expenses
Wages Direct Expenses
Bad Debts Indirect Expenses
Depreciation Indirect Expenses
Rent & Taxes Direct Expenses
Opening Stock Stock In Hand
Salary Indirect Expenses
Loan Received Loan Liabilities
Loan Payable Loan Assets
Bank Overdraft Bank Overdraft
Sample
Goods Tempts Sales A/c.
Goods In Fire Sales A/c.
Goods Lost Sales A/c.
Post And Telegram Expenses Indirect Expenses
Discount Received Income Revenue
Discount Paid Indirect Expenses
Commission Received Income Revenue
Commission Paid Indirect Expenses
Printing & Stationary Expenses Indirect Expenses
Machinery Fixed Assets
Repairs Of Machinery Indirect Expenses
Light Bill Of Office Indirect Expenses
Light Bill Of House ()Drawing Capital
Telephone Expenses Indirect Expenses
Telephonebill Of House (Drawing) Capital
Bony Indirect Expenses
Creditors Sundry Creditors
Debtors Sundry Debtors
Insurance Premium Indirect Expenses
Office Rent Indirect Expenses
Office Expenses Indirect Expenses
Advertisement Indirect Expenses
Building Fixed Assets
Office Instrument (equipments) Current Assets
Deposited (Investment) In Share Current Assets
Interest On Bank loan Indirect Expenses
Goodwill Current Assets
Bank Loan Current Liabilities
Interest Received Income Revenue
Unpaid Salary Current Liabilities
Advanced Paid Premium Current Assets
Unreceived commission Current Assets
Advanced Received Interest Current Liabilities
Charity Indirect Expenses
Income Tax Indirect Expenses
Loan In Staff Current Assets
Interest In Loan In Staff Income Revenue
Cheque Return
Goods Loss By Rain Sales A/c.
Shop Rent Indirect Expenses
Donation Indirect Expenses
Type Writer Fixed Assets
Dharmada Indirect Expenses
Computer Fixed Assets
Loss By Flood Sales A/c.
Royalty Current Assets
Trade Work
Custom Duty Direct Expenses
Conveyance Direct Expenses
Patents Current Assets
Legal Expenses Indirect Expenses
Demurrage Indirect Expenses
Remuneration Indirect Expenses
Professional Tax Paid Indirect Expenses
Dead stock Indirect Expenses
Lease Hold Land Current Assets
Lease Hold Premises Current Assets
Honorarium Indirect Expenses
Rent Received Income Revenue
Rent Paid Indirect Expenses
Compensation Received Income Revenue
Compensation Paid Indirect Expenses
Loss Indirect Expenses
Rent Received In Advanced Current Liabilities